• Friday, September 16, 2022

    Chanakya Biography in Hindi - चाणक्य की जीवन परिचय

    Chanakya Biography in Hindi - चाणक्य की जीवन परिचय

    Chanakya Biography in Hindi - चाणक्य की जीवन परिचय

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    दोस्तों आज हम बात करेंगे आचार्य चाणक्य के बारे में, इन्हें तो आप सभी जानते हैं। चाणक्य के बारे में हमने बहुत सी किताबों में पढ़ा है और T.V में भी देखा है। खास करके एक महान politician मैं चाणक्य का नाम आता है। Acharya Chanakya की पहचान तेज बुद्धि और ज्ञान है, और आज हम इन्हीं महान व्यक्ति के बारे में जानेंगे।

    • नाम (Real Name ) - कौटिल्य/Kautilya, विष्णुगुप्त/Vishnugupta
    • निक नेम (Nick Name) - चाणक्य 
    • प्रसिद्द (Famous for) - राजनीति और अर्थशास्त्र
    • जन्म तारीख (Date of birth) - 375 BC
    • जन्म स्थान (Place of born) - तक्षशिला - Pakistan
    • गृहनगर (Hometown) - तक्षशिला / Taxila
    • मृत्यु तिथि (Date of Death) - 283ई./ 283 BC
    • मृत्यु का स्थान (Place of Death) - पाटलिपुत्र
    • उम्र( Age) - 75 year
    • पिता का नाम (Father) - ऋषि कनक
    • माँ का नाम (Mother) - चनेश्वरी
    • पत्नी का नाम (Wife) - यशोमती
    • धर्म (Religion) - हिन्दू
    • जाति (Caste) - द्रविण ब्राह्मण
    • नागरिकता (Nationality) - मौर्य राजवंश
    • वैवाहिक स्थिति (Marital Status) - विवाहित

    चलिए जानते है चाणक्य की जीवन परिचय - Chanakya Biography in Hindi

    भारत में बहुत से ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया जिन्होंने अपने ज्ञान के बल बूते अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा दिया। ऐसे ही समझदार लोगों की list में एक नाम सामने आता है Acharya Chanakya का, जो की एक Teacher, Philosopher, Economist, Jurist और एक Royal advisor थे। इन्हें ही पूरी दुनिया आज भी सबसे महान politician के तौर पर जानती है।

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    चाहे बीता हुआ पुराना समय हो या फिर आज का समय, लोग एक सफल व्यक्ति बनने के लिए चाणक्य द्वारा बताए गए उसूलों पर ही चलना चाहते हैं। तो चलिए दोस्तों आज के इस blog में हम महान ज्ञानी चाणक्य की पूरी life story को जानते हैं कि किस तरह से अपने अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने नंद वंश को पूरा खत्म कर मौर्य शासन की नींव रखी।

    आचार्य चाणक्य की जीवन परिचय

    हालांकि इस जानकारी को प्रारंभ करने से पहले मैं आपको बताना चाहता हूँ कि चाणक्य की जो Life story है वो बहुत ही ज्यादा पुरानी है और इसीलिए कई सारे अलग अलग लोगों ने अपनी अलग अलग कहानिया बताई हैं। लेकिन आज इस blog में, मैं आपको वही बताऊँगा जिसके बारे में लोग ज्यादातर बातें करते हैं।

    तो कहानी की शुरुआत होती है, आज से करीब 375 BCE तक्षशिला (अब जिला रावलपिंडी, पाकिस्तान) चाणक्य का जनम हुवा, यह गांव उस समय गोला रीज़न के अंतर्गत आता था। साथ ही चाणक्य को लोग कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जानते थे, और बताया जाता है कि वह बचपन से ही बहुत ही ज्ञानी थे।

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    चाणक्य के तेज दिमाग को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें Takshashila के प्रसिद्ध school में पढ़ाई करने के लिए भेज दिया। वहाँ पर चाणक्य को Economics and Vedas (अर्थशास्त्र और वेदों )के बारे में अच्छी जानकारियां पाने का मौका मिला और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद से चाणक्य वही एक teacher के तौर पर पढ़ाने लगे। चाणक्य के समय में एक जगह हुआ करता था Pataliputra जिसे की अब हम Patna के नाम से जानते हैं।

    उस समय पाटलिपुत्र एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य मगध का capital था, जहाँ पर नंदवंश का साम्राज्य था और वहाँ के राजा थे धनानंद। एक बार राजा धनानंद ने मगध के अंदर बहुत बड़ा सा यज्ञ करवाया, जब यह यज्ञ चल रहा था उस समय Chanakya भी वहीं पर मौजूद थे। फिर चाणक्य ब्रह्मभोज के समय ब्राह्मण के गद्दी पर जा बैठे। लेकिन जब राजा धनानंद ब्रह्मभोज वाली जगह पर पहुंचे तब चाणक्य के पहनावे को देखकर उन्हें भरी सभा में Chanakya का मजाक उड़ाया और ब्रह्मभोज के बीच से ही उन्हें उठने का आदेश दिया। 


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    Chanakya Biography

    इन सभी अपमानों से क्रोधित होकर चाणक्य ने अपनी चोटी खोल दी और राजा धनानंद को कहा कि जब तक वह नंदवंश का सफाया नहीं कर लेंगे, तब तक वो अपनी चोटी नहीं बांधेंगे। फिर यहीं से चाणक्य के जीवन का मकसद हो गया सिर्फ और सिर्फ नंदवंश को खत्म करना और अपने द्वारा चुने गए किसी आदमी को राजा बनाना। फिर अपमान सहने के बाद से Chanakya एक जंगल में चले गए और वहाँ उन्होंने सोने के सिक्के तैयार किए जो की कोई खास तकनीक से बनाए गए थे।

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    उनका यह Secret Techniques एक सिक्के को कुल 8 सिक्कों में तब्दील करने की ताकत रखती थी। इस तरह से कुल 800 million सिक्के तैयार करके उन्होंने jungle में ही कहीं छुपा दिया। फिर अब Acharya Chanakya उस आदमी के खोज में निकल गए जो धनानंद की जगह लेकर मगध पर राज़ कर सके। साथ ही उन्होंने राजा धनानंद के बेटे Pabbata से भी दोस्ती बढ़ाई और उसे मगध के सिंहासन को पाने के लिए उकसाने लगे।

    हालांकि इसी बीच Chanakya ने एक लड़के को कुछ बच्चों के साथ बहादुरी से लड़ते हुए देखा और उसे देखकर वह पल भर में ही समझ गए कि यह कोई आम लड़का तो नहीं है। जब उन्होंने उस लड़के के बारे में जानकारियां बटोरी तो यहाँ पता लगा कि वह मौर्य साम्राज्य का वंश चंद्रगुप्त हैं। जिनके पिता की हत्या राजसी लालच के चलते कर दी गई थी और राजकुमार चंद्रगुप्त राज्य से निकाल दिए गए थे।

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    इन बातों को जानने के बाद Acharya Chanakya को यह महसूस हुआ कि चंद्रगुप्त भी धनानंद की गद्दी पाने के योग्य है। हालांकि अभी भी Pabbata जो की राजा धनानंद के लड़के थे और चंद्रगुप्त जो कि मौर्य साम्राज्य के वंश। इन दोनों के बीच किसी एक को चुनना बाकी था और फिर सही चुनाव के लिए आचार्य चाणक्य ने दोनों की परीक्षा लेने की सोची और फिर चाणक्य ने Pabbata और Chandragupta दोनों को धागे में लगी हुई है एक रक्षा कवच दी, जिसे की उन्होंने कहा कि वह गले में पहन कर रखें।

    एक बार जब चन्द्रगुप्त सो रहे थे तब Chanakya ने Pabbata से कहा कि वह चंद्रगुप्त को बिना जगाए हुए और बिना धागे को काटे हुए उनके गले से सुरक्षा कवच को निकाल कर लाए। लेकिन हज़ार कोशीश करने के बाद भी Pabbata यह काम नहीं कर पाए। फिर same यही काम Pabbata के सोते समय चन्द्रगुप्त से करने के लिए कहा गया और फिर क्या था, चन्द्रगुप्त ने तलवार उठाई और Pabbata का सिर धड़ से अलग कर दिया और वो रक्षा कवच चाणक्य को लाकर दे दी और इस तरह से चाणक्य को अब मगध का भावी राजा मिल गया था।

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    चाणक्य नीति
    Chanakya ने अगले 7 सालों तक चंद्रगुप्त को राजनीति और शाही कर्तव्यों की सीख देनी शुरू कर दी। अंत में अपने द्वारा छुपाए गए सोने के सिक्कों को निकालकर चाणक्य ने एक विशाल सेना तैयार किया, जिन्होंने नंदवंश को हराकर चंद्रगुप्त को राजा की गद्दी पर बैठा दिया। जीत के बाद से चाणक्य ने चंद्रगुप्त का प्रधानमंत्री बनकर जीवन बिताया। (Chanakya Biography in Hindi)

    इसी दौरान Acharya Chanakya ने 2 किताबे भी लिखीं इसमें पहले थी चाणक्यनीति (Chanakya Neeti) - इस Book में उन्होंने अच्छे शासक को कैसे शासन करना चाहिए इस बारे में बताया, दूसरी Book थी अर्थशास्त्र (Arthashastra) इसमें चाणक्य ने एक राज्य की आर्थिक नीतियों के बारे में विस्तार से बताया। इस तरह से अपने आप को सबसे सफल politician और ज्ञानी लोगों की गिनती में ला खड़ा करने के बाद चाणक्य ने इस दुनिया को अलविदा कहा। हालांकि उनकी मृत्यु के पीछे भी कई सारी अलग अलग कहानी बताई जाती है।


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    FAQ

    ➤ चाणक्य ने क्या लिखा था?

        Acharya Chanakya ने 2 किताबे लिखीं चाणक्यनीति (Chanakya Neeti) or अर्थशास्त्र (Arthashastra)

    ➤ चाणक्य के 2 शिष्य कौन थे?

        Pabbata और Chandragupta

    ➤ चाणक्य कौन थे?
        Acharya Chanakya एक महान Teacher, Philosopher, Economist, Jurist और एक Royal advisor थे।


    चाणक्य का जन्म कहाँ हुआ था ?
        Acharya Chanakya का जन्म 375 BC तक्षशिला (Taxila), Pakistan पाकिस्तान मै एक गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे।


    आचार्य चाणक्य की पत्नी का नाम क्या था ?
        यशोमती था


    चाणक्य के गुरु कौन थे ?
        Acharya Chanakya के गुरु चणक थे


    चाणक्य के पिता कौन थे ?
        ऋषि कनक थे


    चाणक्य का नाम कौटिल्य क्यों पड़ा ?
        धनानंद से बचने के लिए कौटिल्य नाम रखा था।


    चाणक्य का असली नाम क्या था ?
        विष्णुगुप्त था


    चाणक्य का गोत्र क्या था ?
        Acharya Chanakya का गोत्र कोटिल था


    आचार्य चाणक्य मृत्यु का कारण ?
        भोजन न करने के कारण, विद्वानों के सूत्रों के अनुसार


    आचार्य चाणक्य की शिक्षा ?
        समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र आदि की पढ़ाई


    आचार्य चाणक्य ने किस विश्वविद्यालय से शिक्षा ली ?
        तक्षशिला या टैक्सिला विश्वविद्यालय, प्राचीन भारत (वर्तमान में रावलपिंडी, पाकिस्तान)


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    दोस्तों मै आशा करता हूँ आपको Chanakya Biography in Hindi - चाणक्य की जीवन परिचय, पसंद आई होगी। मैं बस यही कहना चाहूंगा कि Acharya Chanakya ने जो हमें कूटनीति और राजनीति के बारे में अपनी व्याख्या समझाई है, वो सभी की जिंदगी आसान बनाती है। उनके विचार आज भी अक्सर हम को सुनने और देखने को मिली जाते हैं

    उम्मीद करते हैं कि चाणक्य की ये Life story आपको जरूर पसंद आयी होगी। अगर आपको आचार्य चाणक्य के बारे में और जानकारी जानना है, तो आप post के नीचे comment करे। तो मिलते हैं अगली post में नई जानकारी के साथ। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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