• Friday, September 2, 2022

    Top 3 Bhoot ki Kahani - भूत की कहानी | True Horror Story

    Top 3 Bhoot ki Kahani - भूत की कहानी | True Horror Story

    Top 3 Bhoot ki Kahani - भूत की कहानी

    नमस्कार दोस्तों welcome है हमारे Blog, Hindi Best Stories में, दोस्तों हम सबको Bhoot ki Kahani सुनना बहुत पसंद है, ये कहानी बचपन की याद दिलाती है। जब हमारी दादी दादा, नाना नानी, माता पिता हमें बचपन में सुनाया करते थे और फिर हम  डर भी जाया करते थे। दोस्तों वह भी क्या सुनहरे दिन थे बचपन के, आज मैं आपके साथ 3भूत की कहानी share करूंगा। उम्मीद करता हूं आपको यह कहानी  पसंद आएगी।

     
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    1. तो चलिए शुरू करते हैं Bhoot ki Kahani


    मेरा नाम निशान है, मैं जिला Solan के Rampur का रहने वाला हूँ। आज जो कहानी में आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना है। दरअसल यह बात साल 2010 की है। एक दिन मेरे साथ वाले गांव में किसी की शादी थी जिसमे हम गांव के सभी लड़के गए हुए थे। उस वक्त हमारे साथ गांव के एक चाचा जी भी थे।

    शादी में पहुँचकर हम सभी ने शगुन लगाया और इसके बाद खाना खाकर घर की ओर आने लगे, हमें ऐसा जाता देख चाचा जी हमसे कहने लगे कि अरे अभी तो आये हैं, थोड़ा देर रुक कर चलते हैं। इसके बाद चाचा जी तो अपने दोस्तों के साथ party करने के लिए बैठ गए। लेकिन जो हमारे साथ बाकी लड़के गए थे वो कहने लगे कि jungle का रास्ता है, अब हमें यहाँ से चलना चाहिए अगर अंधेरा होने से पहले घर नहीं पहुंचे तो घर में बहुत डांट पड़ेगी।

    ये बात जब मैंने चाचा जी तक पहुंचाई कितो उन्होने कहा की उनसे कहो कि उन्हें जाना है तो जाए पर तुम मेरे साथ ही घर जाओगे। इसके बाद सब लोग अपने घर के लिए निकल गए, शराब पीने के बाद चाचा जी अपने दोस्तों के साथ DJ पर नाचने लगे। उन दिनों सर्दियों का समय था और रात भी काफी हो गई थी मैंने सोचा ठंड में ठिठुरने से तो अच्छा है कि मैं अपने घर को चला जाऊं, इसलिए मैं बिना चाचा जी को बताएं वहाँ से चुपचाप निकल पड़ा।

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    रात का सन्नाटा और सुनसान रास्ता पूरे माहौल को बहुत ही खतरनाक बना रहा था। सच कहूँ तो थोड़ा बहुत डर तो मुझे लग रहा था, पर मैं करता भी तो क्या? मैं चुपचाप चलता रहा चलते चलते मैं एक श्मशान के पास से गुजरा की तभी थोड़ी दूर चलकर मुझे याद आया, कि दो दिन पहले ही यहाँ एक बूढ़े आदमी को जलाया था। बस यही सोचकर मैं तेज कदमों के साथ वहाँ से चलने लगा दोस्तों मैं कुछ ही कदम आगे गया था, कि तभी मुझे ऐसा लगा कि जैसे किसी ने मेरा नाम लेकर मुझे आवाज दी हो।

    मैंने तुरंत ही पीछे मुड़कर देखा, मैंने देखा कि एक बड़ा आदमी हाथ में डंडा लिए मेरी तरफ बढ़ रहा था। उसे देखकर चुप चाप वहीं पर रुक गया, उस बूढ़े आदमी ने मेरे पास आकर मुझसे कहा कि बेटा मुझे भी अपने साथ लेकर चलो, मेरे घर वाले मुझे इस जगह पर अकेला छोड़ चले गए हैं। मैंने तुरंत उस आदमी से पूछा कि आपको कहाँ पर छोड़कर गए हैं? इस पर उसने जवाब दिया कि बेटा मुझे वो श्मशान में छोड़कर गए थे।

    दोस्तों, पहले तो मुझे उस आदमी की बात बड़ी अटपटी लगी, इसलिए मैंने अपने torch की रौशनी उस आदमी के चेहरे पर लगाया। यकीन मानों जब मैंने उसका चेहरा देखा तो मेरा शरीर तो जैसे जम गया था। दरअसल उसकी वजह ये थी की वो बूढ़ा आदमी वही था, जिसे दो दिन पहले ही यहाँ जलाया गया था। बस इसके बाद मेरे अंदर बिल्कुल हिम्मत नहीं बची क्योंकि इसके बाद मैं बेहोश होकर नीचे गिर पड़ा।

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    दोस्तों जब मुझे होश आया तो मैं अपने घर पर अपने bed पर लेटा हुआ था, मेरे घर वाले मेरे चारों तरफ बैठे हुए थे। उस वक्त हम सबके बीच दरगाह के एक बाबा जी बैठे हुए थे। उन्होंने मेरे उठते ही कुछ मंत्र पड़ता मुझ पर पानी के छींटे मारे, मुझे मेरे चाचाजी बेहोशी की हालत में घर लाए थे। पर जब मैं पूरी तरह से होश में आ गया तो दरगाह वाले बाबा जी ने कहा कि बेटा वो आत्मा तुम्हें अपने साथ ले जाना चाहती है। मगर कल रात तुम्हारी कुल देवी ने तुम्हारी रक्षा की है।

    मेरी बात मानो तो तकरीबन एक हफ्ते तक घर से बिल्कुल बाहर मत निकलना और तो और आगे से रात के समय कभी भी ऐसे सुनसान रास्तों पर अकेले बिल्कुल मत जाना। दोस्तों बाबा ने बस इतना ही कहा था, वैसे मैंने उनकी सारी बातें मानी पर एक बात है जो मैं आपसे कहना चाहता हूँ और वो बात ये है की दोस्तों रात में बाहर जाना तो दूर की बात है, अब तो मुझे 12 बजे के बाद खुद के घर में washroom जाने से भी डर लगता है। वैसे उस दिन के बाद से अब तक मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। तो दोस्तों कैसी लगी आपको यह डरावनी Bhoot ki Kahani, comment में बताइए क्या आपके साथ भी ऐसा कभी हुआ है

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    2. Bhoot ki Kahani एक मरे हुए आदमी का प्रभाव

    भूत की कहानी

    हैलो दोस्तों मैं Nepal का रहने वाला हूँ, और ठीक आज जो कहानी में आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ वो मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना है। यह बात तब की है जब मैं 13 साल का था, मेरे पिताजी Indian Army में थे, तब हम लोग India में ही रहते थे, क्योंकि वहाँ पिताजी को सरकारी क्वार्टर मिला हुआ था, हम सब उसी में रहते थे।

    एक दिन की बात है शाम के समय हम सब बच्चे लोग सीताफल नाम के फल तोड़ने के लिए गए हुए थे, उस पेड़ के सामने वाले घर में काफी साल पहले एक आदमी को जलाकर मार दिया गया था। उस वक्त यह बात हम लोगों को नहीं पता थी, हम लोग उस फल को ले कर घर पर आ गए मगर सच कहें तो हमें ये नहीं पता था कि हमारे पीछे पीछे एक आत्मा भी आ गई थी।

    इसके बाद मैंने उस फल को काटकर खाने की कोशीश की और जैसे ही मैंने उस फल को काटा कि, उसी समय मेरे पूरे शरीर पर छोटे छोटे से काले रंग के धब्बे जैसे आ गए थे। उस वक्त मैं बच्चा ही था, मुझे उस समय कुछ भी समझ नहीं आया मेरे लिए ये सब कोई बड़ी बात नहीं थी। पर दोस्तों रात को सोते समय मेरा शरीर इतना गर्म हो गया था कि जैसे कि मेरे शरीर को किसी ने आग पर फेंक दिया हो ठीक उसी रात को हमारे घर पर अचानक से किसी के चिल्लाने की आवाज आ रही थी ऐसा लग रहा था मानो कि जैसे कोई बाहर बैठकर रो रहा हो।

    उस समय मेरे पिताजी भी घर पर नहीं थे, इसीलिए हम लोगो को जाकर दरवाजा खोलने की हिम्मत तक नहीं हुई। खैर वो रात जैसे तैसे कट गयी इसके बाद मेरी माँ ने मुझे बहुत से बाबाजी को दिखाया पर मुझे कोई भी ठीक नहीं कर सका। फिर आखिरी में कहीं जाकर एक Aunty को मालूम हुआ कि कैसे मैं उधर जाकर फल लेकर आया था तब से ही मेरे साथ ऐसा हो रहा है।

    वो Aunty हमारे घर आकर हमें बताने लगी कि बहुत साल पहले वहाँ पर एक आदमी जलकर मर गया था। ये शायद उसी की बुरी आत्मा आपके बेटे के शरीर पर कब्जा किए हुए हैं। दोस्तों, फिर उस Aunty ने चार दिन तक हमारे घर पर पूजा करवाई, पूजा के बाद से ही धीरे धीरे मैं ठीक हुआ। मैं तो उन आंटी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, क्योंकि होना हो अगर वो Aunty नहीं आती तो शायद आज मैं ये कहानी बताने के लिए जिंदा ही नहीं होता।

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    3. कुंडी खटखटाने वाले भूत की कहानी

    True Horror Story

    मेरा नाम jack है, मैं Gwalior के Taraganj का रहने वाला हूँ, और ठीक आज जो Bhoot ki Kahani में आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरे नाना जी के साथ घटी एक सच्ची घटना है। दोस्तों मेरे नाना जी का नाम Ramdayal है, पर ये बात आज से 50 साल पहले की है, जब मेरे नानाजी गौशाला में सारी गायों की देखभाल का काम किया करते थे।

    बात कुछ ऐसी है कि जब मेरे परनाना जी रात में अपने घर में सो रहे थे, तो उसी बीच उनको रात के 3 बजे दरवाजे की कुंडी खटखटाने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने तुरंत ही बाहर की तरफ देखा, उन्होंने देखा कि एक आदमी हाथ में डंडा पकड़े कुछ गाय को अपने साथ लेकर आया था। नाना को देखते ही उसने कहा की चलो गौशाला, वैसे वो आदमी मेरे नाना जी के साथ काम किया करता था और उस आदमी का नाम सूरज था।

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    मेरे नाना जी रोज़ सुबह के समय 4 बजे गोशाला जाया करते थे, लेकिन वो आदमी तो 3 बजे ही आ गया था। पर मेरे नाना जी ने सोचा कि चलो कोई नहीं आज जल्दी चले जाता हूँ। इसके बाद नानाजी उस आदमी के साथ चले गए नानाजी को cigarette पीने का बहुत शौक था। इसलिए वो रास्ते में cigarette पीने लगे दूसरी तरफ सूरज नानाजी से आगे चल रहा था। इसी लिए नानाजी ने उससे कहा कि अरे आगे आगे क्यों चल रहे हो? थोड़ा रुककर cigarette तो पी लो, फिर चलते हैं।

    मगर नाना जी के हिसाब से, उनकी बातें सुन ही नहीं रहा था। नानाजी जितना उसके पास जा रहे थे, वो मेरे नाना जी से उतने ही दूर होते जा रहा था। खैर, थोड़ी देर बाद cigarette भी खत्म हो गयी, cigarette के खत्म होते ही वो आदमी पीछे की ओर पलटा, आप यकीन नहीं करेंगे क्योंकि उसका चेहरा देखकर मेरे नाना जी बहुत डर गए थे। उसका चेहरा खून से लथपथ था, नानाजी ने तुरंत अपनी cigarette जलाई जिसके बाद ठीक वो आदमी उनसे दूर खड़ा होकर हंस रहा था।

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    ये देखकर नाना जी के डर का कोई ठिकाना नहीं रहा था। इसी बीच हंसते हुए वो आदमी और उसकी गाय बगल के तालाब जिसका नाम कर्म सागर है, उसमें जाकर कूद गए। ये सब कुछ उस वक्त मेरे नाना जी की आँखों के सामने हो रहा था, इसके बाद तो नानाजी ने अपनी पूरी जान लगा दी और वहाँ से भाग गए वो। भागकर काली माता के मंदिर में पहुंचे वो जैसे ही वहाँ पहुंचे की तुरंत ही गिरकर बेहोश हो गए।

    इसी बीच वहाँ के लोगों ने उन्हें देखा तो उन्होंने नाना जी को घर पर छोड़ दिया और ठीक जब उन्हें होश आया तो उन्होंने खुद को अपने घर पर पाया, वो सोचने लगे कि मैं तो भागते हुए एक मंदिर में गया था, तो फिर अपने घर कैसे पहुंचा? तभी उनके पास खड़े लोगों ने बताया कि आप मंदिर में बेहोश थे, तो हम ही लोग आपको उठाकर वहाँ से घर लाए। इसके बाद नाना जी ठीक है पर यही किस्सा उनके साथ एक दो बार और हुआ पर वो कभी गोशाला में नहीं जाते थे। साथ ही दोस्तों अब मेरे नाना जी इस दुनिया में नहीं है उनकी मौत 2015 में हो चुकी है।

    तो दोस्तों यह थी Bhoot ki Kahani, अगर आपके साथ भी ऐसा हादसा हुआ है, तो आप comment में बताइए। उम्मीद करता हूं आपको यह True Horror Story पढ़कर अच्छा लगा होगा, ऐसे ही और भी नई कहानी लेकर मिलते हैं अगले post में।

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